देश का बजट: सरकार फेल या पास ?

22:10:00 Manjar 0 Comments

 ‘' आपकी परीक्षा शुरू हो रही है। मुझे भी कल परीक्षा देनी है। सवा-सौ करोड़ देशवासी मेरी कल परीक्षा लेने वाले हैं। पता है न, अरे भई, कल बजट है 29 फरवरी, ये लीप वर्ष होता है। लेकिन आपने देखा होगा, मुझे सुनते ही लगा होगा, मैं कितना स्वस्थ हूं, कितना आत्मविश्वास से भरा हुआ हूं । बस, कल मेरी परीक्षा हो जाये, परसों आपकी शुरू हो जाये। और हम सब सफल हों, तो देश भी सफल होगा। ’’

तो सवाल उठता हैं कि क्या परीक्षा में पास हुए वित्त मंत्री? बजट से पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री का ऐसा कहना संकेत दे रहा था कि इस बार की बजट में नरेंद्र मोदी की छाप छूटेगी। इस बार के बजट में किसानों और गरीबों की बात होगी, गरीबों और निम्नवर्गों को सहूलियत की बात होगी । लेकिन मिला कितना ? इस बारे में बाते होगी। 2019 के बदले टारगेट 2022 का लिया जा रहा हैं। किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुनी करने के सपने दिखाए गए हैं। जमीन पर अभी किसानों की औसत आय राष्ट्रीय आय से बेहद कम हैं । कुछ अग्रणी राज्यों को छोड़ दे तो 17 राज्यों की औसत आय 1 हजार 6 सौ 66 रुपये हैं। सरकार पर विश्वास करें तो 6 सालों बाद इनकी आय 3332 रुपये हो जायेगी। इस क्षेत्र में सुधार की घोषणा करते हुए किसानों पर ऋण का बोझ कम करने के लिए 15,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। फ़सल बीमा योजना के लिए 5,500 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया। विशेस सुधार के लिए 0.5 कृषि कल्याण सेस लगाया । जिससे सर्विस टैक्स 14.5 फीसदी से बढ़कर 15 फीसदी हो जायेगी। यानी मध्यमवर्ग के पीठ पर महंगाई का बोझ टूटेगा। बाहर खाना पीना फिल्में देखना सब महंगा हो जायेगा। पूरे देश में सिंचाई के इंतजाम के लिए 19,000 करोड़ का दिया गया है। छह लाख गांवों के खेतों तक यह सुविधा बढ़ाने के लिए कम से कम दो लाख करोड़ की जरूरत बताई गई हैं। गरीब लोग बीड़ी पीते हैं सरकार ने इसका ख्याल रखा हैं। सिगरेट महँगा कर तथा बीड़ी सस्ता कर अपनी प्रतिबद्धता जताई।

इस बजट में मध्य वर्ग को निराशा हुई। जेटली जी भी विपक्ष में रहते आयकर छूट की सीमा 5 लाख रुपये तक करने की बातें किया करते थे। तब खुद स्वयं नरेंद्र मोदी भी मध्यवर्ग की वकालत करते हुए प्रत्यक्ष कर में ज्यादा छुट देने की मांग करते थे। कई बजट से टैक्स स्लैब की सीमा बढ़ने की राह तकने वाले लोगों को फिर इंतजार ही मिला। पिछले बजट से जगी आस आयकर मुक्त सीमा को कम से कम तीन लाख तक तो कर ही दिया जाए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। डेविडेन्ट पर टैक्स और 1 करोड़ की आय पर 15% का सरचार्ज लगने से अमीरो को भी राहत नही मिलेगी। महंगाई के अनुसार इसे बढ़ना चाहिए था लेकिन वैश्विक मंदी ने लगभग सभी वस्तुओं पर ब्रेक लगा दिया हैं। सेवा कर की दरों में आधा प्रतिशत की बढ़ोतरी से खाना-पीना, यात्रा करना, बिजली-मोबाइल का बिल,केबल और तमाम चीजें महंगी हो जाएंगी। अब चार चक्का वाली गाड़ी खरीदना भी महंगा हो जायेगा। पहले सरकार को वस्तुस्थिति की जानकारी थी की कि किसका धन कहाँ छुपा हैं। और काला धन आने पर प्रत्येक भारतीय को 15 लाख मिलगा। लेकिन अब कहा जा रहा हैं कि बस अपना अघोषित आय सामने लाने वालों को 45 फीसदी टैक्स लगाकर माफ कर दिया जाएगा। बकि 55 फीसदी पर मौज करें। गौरतलब है कि जेटली की ब्लैक मनी निकलवाले की पिछली स्कीम सुपर फ्लॉप रही और 90 दिन में सामने आए महज 3770 करोड़ रुपये। इससे सफल तो 1997 में गुजराल सरकार में वित्त मंत्री पी चिदंबरम की वीडीआईएस स्कीम रही जब न सिर्फ 33 हजार 697 करोड़ रुपये सामने आए बल्कि सरकार को उसपर टैक्स से मिले तकरीबन 10 हजार करोड़। आरोप लगा कि जेटली के मंत्रालय ने योजना बनाने से पहले पर्याप्त होमवर्क नहीं किया और सरकार की काफी बेइज्जती हुई। मनरेगा यूपीए सरकार की महत्वाकांक्षी योजना थी। कांग्रेस के लोग इसका जिक्र बारबार अपने भाषण में करते रहे हैं। तब के समय में नरेंद्र मोदी कहते थे कि यह योजना ला कर कांग्रेस ने खुद अपना ही कुआं खोद दिया । लेकिन मनरेगा के लिए अब 38500 करोड़ रुपये की राशि, ये अब तक की सबसे ज्यादा राशि आवंटित की गई। बजट में आंकड़े घुमे छिपे हैं। अंदाजा लगाना मुश्किल हैं कि सरकार ने खेती-किसानी पर विशेष ध्यान दिया हैं या उद्योग-व्यापार पर। कई अर्थशास्त्रियों का अनुमान था कि इस बार बजट का आकार बढ़कर कम से कम डेढ़ गुना हो जाएगा। उनका तर्क था कि टूजी-थ्रीजी जैसे आवंटनों, कोयला खदानों की भ्रष्टाचारमुक्त नीलामियों से पांच-सात लाख करोड़ की आमदनी बढ़ेगी, लेकिन यह आमदनी बढ़ी नहीं दिखी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए निजी क्षेत्र और पीपीपी के रास्ते से रकम खर्च करने का तरीका इस और इशारा कर रहें कि निजीकरण करा कर अमीरों को फायदा सरकार द्वारा दिलाया जायेगा। किसानो के लिए पानी का संकट, बैंकों से कर्ज मांगने वाले किसानों की भारी भीड़, बेरोजगारों का सैलाब इस बजट की नाकामी के तौर ला सकता हैं। फिर भी इतना जल्दी बजट के बारे में समीक्षा करना थोड़ा मुश्किल हैं। कुछ दिन बाद और आंकड़े साफ स्थिति में आएंगे तब आंकलन बेहतर ढंग से हो सकेगा ।
फिलहाल बजट हाइलाइट-
-सोना खरीदना हुआ महंगा, बीड़ी छोड़ सभी तंबाकू उत्पाद भी महंगे
-सभी टैक्स योग्य सेवाओं पर 0.5 कृषि कल्याण सेस लगाया जाएगा।
-काला धन सामने लाने के लिए एक जून से 30 सितंबर तक मौका, 45 फीसदी जुर्माना लगेगा
-विभिन्न मंत्रालयों द्वारा लगाए जाने वाले 13 तरह के टैक्स खत्म -काला धन सामने लाने का एक और मौका मिलेगा
-सिगरेट, पान मसाला, ब्रांडेड कपड़े, गाड़ियां महंगी -कारों, एसयूवी, डीजल गाड़ियों पर इंफ्रा सेस लगेगा।
-पहली बार मकान खरीदने पर 50 हजार रुपये की अतिरिक्त छूट मिलेगी।
-एक जून से कृषि कल्याण उपकर लगाया जाएगा -10 लाख से ज्यादा कीमत वालों कारों पर एक फीसदी अतिरिक्त टीडीएस
-मकान किराये में टैक्स छूट की सीमा 24 हजार से 60 हजार रुपये की गई -छोटे करदाताओं को राहत, 5 लाख तक की आय को तीन हजार का फायदा
-दाल की कीमत स्थिर रखने के लिए 900 करोड़ रुपये का फंड
-अगले वित्तीय वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा 3.5 फीसदी तक लाने का लक्ष्य -परमाणु बिजली के लिए 3000 करोड़ रुपये की व्यवस्था।
-कंपनी अधिनियम 2013 में संशोधन किया जाएगा।
-दालों की कीमत कम करने के लिए बफर स्टॉक बनेगा।
-मुद्रा बैंक के लिए एक लाख 80 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था
  -बैंकों में एनपीए की समस्या से निपटने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे
-फूड प्रोसेसिंग के लिए 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी
-50 हजार किलोमीटर का स्टेट हाइवे बनेगा -10 हजार किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग का विस्तार होगा
-परमिट राज को खत्म किया जाएगा, मोटर वाहन अधिनियम में बदलाव होगा
-ईपीएफओ के लिए एक हजार करोड़ रुपये का फंड
-रेलवे व सड़क परिवहन में कुल 2.18 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा
-तीन साल तक नए कर्मचारियों को ईपीएफ का अंशदान 8.33 फीसदी देगी सरकार
-सड़कों के लिए नए वित्तीय वर्ष में 97 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान
-15000 बहु कौशल प्रशिक्षण संस्थान बनेंगे। -स्किल इंडिया मिशन के लिए 1700 करोड़ रुपये की राशि
-अगले दो वर्ष में 62 नवोदय विद्यालय खोले जाएंगे
-सस्ती दवाओं की 3000 दुकानें खुलेंगी, गरीबों को मिलेगी बड़ी राहत -सभी जिला अस्पतालों में डायलसिस की सुविधा मुहैया कराई जाएगी -प्रति परिवार 1 लाख तक मेडिकल इंश्योरेंश, सीनियर सिटिजन के लिए 30 हजार का टॉप अप -5 करोड़ बीपीएल परिवारों को महिलाओं के नाम एलपीजी कनेक्शन दिए जाएंगे -राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान शुरू किया जाएगा, 655 करोड़ रुपये आवंटित -16.8 करोड़ ग्रामीण परिवारों के पास कंप्यूटर नहीं, इनमें डिजिटल साक्षरता बढ़ाने के लिए स्कीम चलाई जाएगी। -23 फरवरी 2016 तक 5542 गांवों का विद्युतीकरण किया जा चुका है। 1 मई 2018 तक हर गांव में बिजली पहुंच जाएगी। -मनरेगा के लिए 38500 करोड़ रुपये की राशि, ये अब तक की सबसे ज्यादा राशि -किसानों के लिए डेयरी उद्योग ज्यादा लाभप्रद हो इसके लिए चार नई योजनाएं बनाई गई हैं-जेटली -पीएम फसल बीमा योजना के लिए 5 हजार 500 करोड़ रुपये -आधार कार्ड को संवैधानिक दर्जा दिया जाएगा -कृषि बाजार को जोड़ने के लिए ईप्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा -ग्रामीण सड़क योजना पहले की तुलना में ज्यादा प्रभावी ढंग से लागू -देश की भंडारण क्षमता में 97 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी


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व्यक्ति विशेष: नाथू सिंह

13:53:00 Manjar 1 Comments



व्यक्ति विशेष : नाथू सिंह

व्हाट अ बोल। ठैट बोल वाज प्रोड्यूसिंग एक्सट्रा पेस एंड बिटस् दी बैट्समैन। दिस इज सेंसिबल ओपनिंग बाय दिस यंग टैलेंटेड बोलर।

हवा से बात करते हुए दाहिने हाथ के तेज गेंदबाज नाथू सिंह ने अपने हाथ के कमाल से सबको हतप्रभ कर दिया।
20 साल के युवा गेंदबाज अपनी प्रतिभा के बदौलत   ITC Gardenia Hotel बंगलुरु में 7 फ़रवरी 2016 को सम्पन्न आई पी एल नीलामी में अपने बेस प्राइस 10 लाख से  32 गुना ज्यादा 3.2 करोड़ में मुम्बई इंडियंस ने खरीदा। पुणे सुपरजाइंट्स और दिल्‍ली डेयरडेविल्‍स के बीच नाथू सिंह को खरीदने की होड़ मची और आखिर में बाजी मुंबई इंडियंस ने मारी। दिल्ली डेयरडेविल्स के सीआईओ हेमंत दुआ का नीलामी के बाद कहना था कि हमारी विशलिस्ट में नाथू शामिल थे लेकिन अफसोस हम ऐसा कर न सके।
नाथू सिंह तेज गेंदबाज हैं और लगातार 140 किमी प्रति घंटा की गति से गेंदें फेंकने का माददा भी रखते हैं।
नाथू की पेस के मुरीद राहुल द्रविड़, ग्लेन मैक्ग्राथ और गौतम गंभीर जैसे दिग्गज क्रिकेटर हैं कहा जाता हैं जब वे लैंथ बॉल डालते हैं तो उन्हें खेलना बहुत मुश्किल हो जाता है। उनके चयन के बारे में मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटील ने कहा कि नाथू में काफी स्पार्क है और हमने उसमें स्पेशल देखा है और इसीलिए उसे मौका देना चाहते हैं।

जयपुर, राजस्थान में जन्मे इस युवा तेज गेंदबाज को भारी आर्थिक दिक्कत का सामना करना पड़ा।
नाथू के पिता भरत सिंह वायर फैक्‍ट्री में मजदूरी करते हैं और उन्‍हें 7 हजार रुपये सैलरी मिलती है। भरत पहले खेती किया करते थे लेकिन इससे उनका गुजरा चल नही रहा था। इसलिये वे शहर आना बेहतर समझे। उन्‍होंने शहर आकर फैक्‍ट्री में काम करने लगे। भरत टिन शेड से बने दो कमरे के घर में रहते हैं। रहने का भौतिक साधन न होने के बावजूद ठिठुरता ठंड और गर्म रात में भी जीवन जीने का उद्देश्य तलाश लिए । रात सपने में गेंद लेके भागते,कदमो से हवा को पीछे धकेलते शरीर में करेंटे सी उत्तेजन पैदा हो जाती। जिससे रात से ही सुबह का इंतजार रहता। और यह परिश्रम,अनुशासन,लग्न जिंदगी में सुबह ला ही दी।
वहाँ बेटा करोड़ो में खेल रहा था यहाँ पिता बेख़बर ट्रक में वायर लोड कर रहें थे। तबतक उन्हें किसी ने इस बारे में सूचना दी । मजदूरी करके 7000 प्रति माह कमाने वाला पिता को वह गौरव के पल को संभालना बेहद कठिन हुआ होगा।

नाथू बताते हैं, 'मैं अपने घर भी नहीं था क्योंकि मां भी बेहद तनाव में थीं। मैं अपने दोस्त के घर था जब नीलामी शुरू हुई और मेरे नाम आया तो मैं भी बेहद तनाव में आ गया था। मेरे लिए पहली बोली आरसीबी ने 10 लाख रुपए लगाई मुझे हद से अधिक खुशी हुई। मेरे लिए बोली की रकम से ज्यादा अहम बात यह थी कि मेरे लिए बोली लगी। मेरे दोस्तों के लिए जश्न मनाने के लिए यह काफी था।' हालांकि जब मुंबई इंडियंस ने दिल्ली और आरसीबी से अधिक तीन करोड़ पार कर बोली लगाई तो भी मेरे लिए खुशी उतनी ही थी।

नाथू के पिता बताते हैं कि जब उनके बेटे ने क्रिकेट खेलने की इच्छा जताई तो उन्हें भरोसा नहीं था कि वह इतना अच्छा कुछ कर पाएगा।
नाथू कहते हैं,एक भैया ने उसे बड़े स्तर पर खेलने को कहा। इस पर उसने सुराणा एकेडमी में एडमिशन लेने का सोचा। इस एकेडमी में खेलने के लिए 10 हजार रूपये की जरूरत थी लेकिन नाथू के पिता के पास इतने पैसे नहीं थे तो उन्होंने दो महीने के लिए ही नाथू का एडमिशन कराया। दो महीने बाद एकेडमी के कोच और नाथू के मामा(maternal uncle) ने कहा कि उसे और समय देना चाहिए क्योंकि उसमें काबिलियत है। नाथू के आर्थिक हालातों को देखते हुए एकेडमी ने फीस कम कर दी और साल भर के अंत तक उसे राजस्थान अंडर-19 टीम में जगह मिल गई।
नाथू बताते हैं, 'मुझे हर महीने दस हजार रुपए फीस देनी थी। हमारे लिए बड़ी रकम थी। मेरे पिता ने यह रकम उधार ली और वह दो फीसदी सालाना के ब्याज पर।' नाथू सिंह के लिए फीस की समस्या तो खत्म हो गई थी लेकिन बाकी मुश्किलें जस की तस थीं। किट और बाकी खर्च बेहद मुश्किल तरीकों से जुटाए गए। नाथू याद करते हैं, 'मैं वे जूते पहनता था जिन्हें सीनियर्स पहनना बंद कर देते थे। लोकल टूर्नमेंट्स में खेलकर किट के लिए पैसा कमाता था।'

उनका कहना हैं कि जब वे 12 साल के थे और आठवीं में पढ़ा करते थे तो टेनिस गेंद से गेंदबाजी किया करते थे। वे इसे अच्छा मानते हैं क्योंकि टेनिस गेंद को जल्दी से डिलवरी करने के लिए कंधो का ज्यादा उपयोग होता हैं। बाद में मजबूत कंधों से ही तेज गेंद फेका जाता हैं।

टर्निंग पॉइंट

नाथू सिंह उस समय सुर्खियों में आए जब उन्होंने पिछले साल दिल्ली के खिलाफ रणजी मुकाबले में पदार्पण करते हुए 87 रन देकर 7 विकेट झटक लिए। इसके बाद वह टेस्ट सीरीज से पहले दक्षिण अफ्रीकी टीम के खिलाफ अभ्यास मैच के लिए बोर्ड अध्यक्ष एकादश में शामिल किए गए। नाथू टी-20 में काफी सफल रहे हैं। उन्होंने 11 मैचों में 21 विकेट झटके।


नाथू ने कहा कि वो आईपीएल में मुंबई इंडियंस टीम के साथ जुड़ाव को लेकर बहुत खुश और उत्साहित हैं।  ज़िम्मेदारी बड़ी है लिहाज़ा इस पर खरा उतारना ही मेरी प्राथमिकता रहेगी। 
यदि मुझे टीम के प्लेयिंग इलेवन में खेलने का मौक़ा मिला तो मैं अपना शत प्रतिशत लगाकर टीम को हर मैच जिताने की कोशिश करूंगा।
आई पी एल एक बड़ा प्लेटफॉर्म हैं मैं कोशिस करूँगा कि भारत के लिए जल्द से खेल सकूँ।
नाथू ने अपनी बांह पर एक टैटू भी बना रखा है जिस पर माता-पिता लिखा हुआ है।
बहुत ही गरीब परिवार में जन्मे,विपरीत परिस्थिति से लड़ते हुए आज अपना सितारा चमका रहे हैं।
हम इनका सफल भविष्य की कामना करते हैं।
ऐसे ही लड़ते रहें,खेलते रहें। युवा होके युवाओं के लिए आदर्श बनना बेहद चुनौतीपूर्ण रहता हैं। धन्यवाद नाथू हमें यह बतलाने के लिए लक्ष्य जब हासिल करना हो तो कोई भी चीज पीछे नही धकेल सकती। आप ऐसे ही मेहनत करते रहिये जल्द इंडिया टीम में आके अपनी प्रतिभा से सबको अपना मुरीद बना लीजियेगा। संघर्ष की गाथा जरूरी लम्बी हैं,परन्तु जिन्हें यकीन होता हैं खुद पर, वे जानते हैं कि कैसे काली रात को पार कर सुबह की ठंडी हवा का सुकून हासिल करना हैं।

और धन्यवाद आकिब आपने इनके बारे में बताया जिससे मैं अपने विशेष कॉलम 'व्यक्ति विशेष' में शामिल कर सका।


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व्यक्ति विशेष:अल्बर्ट आइंस्टीन

09:45:00 Manjar 0 Comments



व्यक्ति विशेष:अल्बर्ट आइंस्टीन
पूरा नाम: अल्बर्ट हेर्मन्न आइंस्टीन

जन्म:14 मार्च 1879 Ulm वुट्टरनबर्ग  , जर्मन साम्राज्य
मृत्यू: 18 अप्रैल 1955 (उम्र 76)
प्रिंसटन, न्यू जर्सी, सयुक्त राज्य अमेरिका
पिता            – हेर्मन्न आइंस्टीन
माता            – पौलिन कोच
शिक्षा           –  स्विट्जरलैड में उन्होंने अपनी शिक्षा प्रारंभ  की
* ज्युरिच के पॉलिटेक्निकल अकादमी में चार साल बिताये
* 1900 में स्तानक की उपाधि ग्रहण कर स्वीटजरलैड का नागरिकता का स्वीकार कर ली
* 1905 में आइंस्टीन ने ज्युरिंच विश्वविद्यालय से P.H.D. की उपाधि प्राप्त की
विवाह  –  दो बार (मरिअक के साथ). दूसरा एलिसा लोवेंन थाल
प्रसिद्ध कार्य: सापेक्षता and special relativity 
प्रकाश वैधुत प्रभाव Mass-energy equivalence  Theory of Brownian Motion Einstein Field equations Bose-Einstein statistics
Unified Field Theory EPR paradox

पुरस्कार: भौतिकी का नोबेल पुरस्कार (1921)Matteucci Medal (1921)Copley Medal (1925)Max Planck Medal (1929)Time Person of the Century (1999)

गुरूत्वाकर्षण तरंगो की पृष्टि होते ही अंतरास्ट्रीय जगत में खलबली मच गई।  इस सदी की महानतम खोजों में एक माना जा रहा है। पूरी दुनिया के मीडिया में ये सुर्खियां बनी हुई है। भारत के 60 वैज्ञानिक इस प्रोजेक्ट के हिस्सा थे। अल्बर्ट आइंसटाइन की ठीक 100 साल पहले की भविष्यवाणी सटीक साबित हुई। इससे क्वांटम फिजिक्स और जेनरल फिजिक्स की दूरी मिट जाएगी, इसलिए इसे ‘थ्येरी ऑफ एवरीथिंग’ कहा जा रहा है।

भारतीय समेत दुनियाभर के वैज्ञानिकों के एक संघ ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने पहली बार गुरुत्वाकर्षण तरंगों की झलक पाई है, जिनकी अल्बर्ट आइंस्टीन ने लगभग एक सदी पहले भविष्यवाणी की थी। ब्लैक होल्स से लेकर, बिग बैंग थ्येरी और न्यूट्रॉन स्टार्स जैसी बुनियादी जानकारी को पुख्ता करने की राह खुली है।

आइंस्टीन की घोषणा के मुताबिक एक विशाल गुरुत्वाकर्षण तरंग पैदा हुई, जो पृथ्वी पर 14 सितंबर 2015 को पहुंची

भारतीय समेत दुनियाभर के वैज्ञानिकों के एक संघ ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने पहली बार गुरुत्वाकर्षण तरंगों की झलक पाई है, जिनकी अल्बर्ट आइंस्टीन ने लगभग एक सदी पहले भविष्यवाणी की थी। इसे सदी की ‘सबसे बड़ी खोज’ माना जा रहा है।

शोधकर्ताओं ने कहा, अंतरिक्ष में करीब 1.3 अरब वर्ष पहले दो ब्लैक होलों की टक्कर हुई थी। उनके पदार्थों के परस्पर मिलने से एक विशाल गुरुत्वाकर्षण तरंग पैदा हुई, जो पृथ्वी पर 14 सितंबर 2015 को पहुंची। उसी समय उसे दो जटिल उपकरणों की मदद से दर्ज किया गया। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस खोज से ब्रह्मांड के ‘अंधेरे’ पक्ष के बारे में अहम जानकारियां जुटाने में मदद मिल सकती है। अमेरिकी नेशनल साइंस फाउंडेशन के निदेशक फ्रांस कोरडोवा ने कहा, यह खोज उसी तरह है जिस तरह गैलिलियो के पहली बार दूरबीन को अंतरिक्ष की ओर करने से ब्रह्मांड के बारे में हमारी समझदारी बढ़ी और अनेक अप्रत्याशित खोजों का रास्ता साफ हुआ।

गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता अमेरिका के वाशिंगटन और लुइसियाना स्थित स्थित दो भूमिगत डिटेक्टरों की मदद से लगाया गया। ये डिटेक्टर बेहद सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण तरंगों को भी भांप लेने में सक्षम हैं। इससे जुड़ी योजना को लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रैविटेशनल-वेव ऑबजर्वेटरी या लिगो नाम दिया गया है।गुरुत्वाकर्षण तरंग खोजने के लिए अमेरिका में एक-दूसरे से 3,000 किलोमीटर की दूरी पर चार किलोमीटर लंबी दो निर्वात सुरंगों में यंत्र लगाए गए, जिन्होंने गुरुत्वाकर्षण तरंग की वजह से प्रोटोन के 100वें हिस्से जितना विचलन रिकॉर्ड किया। वैज्ञानिकों को इन तरंगों की पुष्टि करने में करीब चार महीने लगे।

गुरुत्वाकर्षण तरंगें अंतरिक्ष के फैलाव का एक मापक हैं। ये विशाल पिंडों की गति के कारण होती हैं। इनके जरिये अंतरिक्ष और समय को एक अकेले सतत पैमाने पर देखा जा सकता है। ये प्रकाश की गति से चलती हैं और इन्हें कोई चीज रोक नहीं सकती। आइंस्टीन ने कहा था कि अंतरिक्ष-समय एक जाल के समान है, जो किसी पिंड के भार से नीचे की ओर झुकता है। आइंस्टीन ने बताया कि हमारी यह दुनिया त्रिआयामी नहीं है, जैसी हमें दिखती है, बल्कि 'समय' उसका चौथा आयाम है। इस चतुअरयामी काल-दिक निरंतरता में किसी पिंड की वजह से जो झोल पड़ जाता है, वही उस पिंड का गुरुत्वाकर्षण है। इसे यूं समझें कि कोई चादर है या रबड़ की लचीली परत है, जिसे चारों कोनों से पकड़कर लोग खड़े हैं। अगर हम चादर की ब्रह्मांड से तुलना करें, जो अनंत विराट चतुअरयामी चादर है और जिसमें अरबों-खरबों पिंड हैं, तो इन पिंडों की वजह से इस दिक् काल में जो झोल पड़ते हैं, वे उन पिंडों की गुरुत्वाकर्षण शक्ति है। आइंस्टीन का कहना था कि यह शक्ति तरंगों के रूप में होती है।
जबकि गुरत्वाकर्षण तरंगे किसी तालाब में कंकड़ फेंकने से उठी लहरों की भांति हैं। शख्सियत में आज बात करेंगे उस महान शख्स के बारे में जिसने अपने लग्न और कुशाग्र बुद्धि के कारण दुनिया के व्यवहार करने का तरीका बदल दिया। जिसने अपने समय से कई वर्ष आगे जाकर काम किया।

आइंस्टीन के पिता हरमन आइंस्टीन एक इंजिनियर और सेल्समन थे जबकि उनकी माता पोलिन आइंस्टीन थी।
दिसम्बर 1894 के अंत में,स्कूल से छुट्टी लेकर अपने पाविया के परिवार में शामिल होने के लिए उन्होंने इटली की यात्रा करना प्रारंभ किया। उन्होंने झूठ बोलकर अपनी स्कूल में मेडिकल ईलनेस के लिए छुट्टी ली। क्योंकि वे स्कूल के तौर-तरीको से प्रसन्न नही थे। इस छुट्टी के दौरान उन्होंने इटली की यात्रा की।  इटली की यात्रा करते समय उन्होंने “State of Ether in a Magnetic Field" की खोज पर एक छोटा सा निबंध लिखा।
1895 में इंस्टें ने 16 साल की उम्र में स्विस फ़ेडरल पॉलिटेक्निक, जुरिच की एंट्रेंस परीक्षा दी। भौतिकी और गणित के विषय को छोड़कर बाकी दुसरे विषयो में वे पर्याप्त मार्क्स पाने में असफल रहें।
सितम्बर 1896 में, फिर उन्होंने स्विस की परीक्षा दी और इस समय पास हुए। साथ ही साथ उन्हें अच्छे ग्रेड भी मिले, जिनमे भौतिकी और गणित में टॉप 6 में से एक थे।
अल्बर्ट आइंस्टीन की होने वाली पत्नी मीलेवा मारीक ने भी उसी साल पॉलिटेक्निक में एडमिशन लिया था। गणित और भौतिकिशास्त्र के 6 विद्यार्थियों में से वो एकमात्र महिला थी। साथ वक़्त बिताने और एक साथ ही रहने-मिलने से मारिक के साथ दोस्ती प्यार में बदल गया।
 अल्बर्ट आइंस्टीन  का हमेशा से यही मानना था की हम चाहे कोई छोटा काम ही क्यू ना कर रहे हो, हमें उस काम को पूरी सच्चाई और प्रमाणिकता के साथ करना चाहिये।
बचपन में उन्हे अपनी मंदबुद्धी बहुत अखरती थी। ज्यादातर कामों में वे धीमा हो जाते थे। पढ़ने में कमजोर होने से कई बार उन्हें साथियों के उपहास का सामना करना पढ़ता।शिक्षक अक्सर उन्हें टोक देते थे। जिससे वे परेशान हो जाते थे। आगे बढने की चाह हमेशा उनपर हावी रहती थी। पढने में मन नहीं लगता था फिर भी किताब हाँथ में लिए कोशिस करते रहते। टीचर कहते 'आइंस्टीन अभ्यास करते रहो' और आइंस्टीन इस बात पर अंत तक टिके रहें। उनके वैज्ञानिक जिज्ञासा को उनके चाचा ने जगाया। चाचा उन्हें जो उपहार देते थे, उनमें अनेक वैज्ञानिक यंत्र होते थे। उपहार में चाचा से प्राप्त कुतुबनुमा ने उनकी विज्ञान के प्रति समर्पण का भाव ला दिया।
स्वयं को वे साधारण-सा व्यक्ति मानते थे। अपने समकालीन महापुरुषों में उनकी गाँधीजी के प्रति गहरी भक्ति-श्रद्धा थी।
आइंस्टीन अपनी खराब याददाश्त के लिए बदनाम थे। वे अक्सर तारीखें, नाम और फोन नंबर भूल जाते थे। वे 1902 में एक अवैध संतान के पिता बने। 1879 में जन्मे आइंस्टीन की कानूनी रूप से 1909 और 1919 में दो शादियाँ हुईं थीं। उनकी प्रथम शादी उनकी कजिन से हुई। विवाद कभी भी उनका पीछा नही छोड़ा। यहां तक नोबेल पुरस्कार के साथ मिलने वाली राशि पर उनका अधिकार नहीं हो पाया। यह राशि उनके तलाक के दौरान बीवी से सेटलमेंट के दौरान देनी पड़ी।
अल्बर्ट आइंस्टीन अपने दिमाग में ही शोध का विजुअल प्रयोग कर खाका तैयार कर लेते थे। यह उनके लेबोरेट्री प्रयोग से ज्यादा सटीक होता था। 
एक पैथोलॉजिस्ट ने आइंन्स्टीन के शव परीक्षण के दौरान उनका दिमाग चुरा लिया था।

 वे सापेक्षता के सिद्धांत और द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण E = mc2 के लिए जाने जाते हैं। उन्हें सैद्धांतिक भौतिकी, खासकर प्रकाश-विद्युत ऊत्सर्जन की खोज के लिए 1921 में नोबेल पुरुस्कार प्रदान किया गया। आइंसटाइन ने सापेक्षता के विशेष और सामान्य सिद्धांत सहित कई योगदान दिए। उनके अन्य योगदानों में- सापेक्ष ब्रह्मांड, केशिकीय गति, क्रांतिक उपच्छाया, सांख्यिक मैकेनिक्स की समस्याऍ, अणुओं का ब्राउनियन गति, अणुओं की उत्परिवर्त्तन संभाव्यता, एक अणु वाले गैस का क्वांटम सिद्धांतम, कम विकिरण घनत्व वाले प्रकाश के ऊष्मीय गुण, विकिरण के सिद्धांत, एकीकृत क्षेत्र सिद्धांत और भौतिकी का ज्यामितीकरण शामिल है। आइंस्टीन ने पचास से अधिक शोध-पत्र और विज्ञान से अलग किताबें लिखीं।
आखिर एक दिन 'ह्रदय गति' के रुकने से मौत हो गई। मरने का कारण Abdominal aortic aneurysm बताया गया। तब वे 76 वर्ष के थे। लेकिन आइंस्टीन ने अपने प्रभाव में कई दशकों को ले लिया। एक कमजोर विधार्थी के रूप में शुरुआत कर दुनिया के श्रेष्ट व्यक्ति बन गए। वे लग्न,परिश्रम और प्रयास को अपना हथियार बनाये। अल्बर्ट आइंस्टीन को विज्ञान के नए रहस्य सुलझाने के साथ ही उनका विज्ञान में प्रभाव बढ़ता चला जायेगा। गुरुत्वाकर्षण तरंग के सटीक भविष्यवाणी पर उन्हें फिर से 'बुद्धिमानी का केंद्र' बना दिया।


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