प्रदूषण मुक्त दिल्ली; खुशहाल दिल्ली

हमारा शहर एक घटना प्रधान शहर हैं। न..ना हमारा देश एक समस्या प्रधान देश हैं।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऑड-ईवन स्कीम को समर्थन के लिए दिल्लवासियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में जल्द ही इस योजना के बेहतर स्वरूप की घोषणा होगी और उसे लागू किया जाएगा, जिसमें जरूरी 'सावधानियां और बदलाव' शामिल होंगे।
इसी धन्यवाद ज्ञापन सामोरह के बीच में "शहर में घटना घट गई" भावना,भावना में बह के इस स्कीम के सफलता का सर्टिफिकेट स्याही फेंक कर दे दी।

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने दिल्लावासियों को बधाई देते हुए कहा कार पूल करने को लेकर देश के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की ने जिस प्रकार लोगों को बड़ी संख्या में जुड़ने की अपील की वह सहरानीय था।
आज के दिन  सोमवार को अलग-अलग विभागों की बैठक इस बात को समझने के लिए हो रही है कि 1 जनवरी से 15 जनवरी के बीच लागू इस योजना को लेकर क्या परेशानियां आईं। आने वाले दिनों में इस योजना के बेहतर स्वरूप का ऐलान किया जाएगा, जिसमें सावधानियां और बदलाव शामिल होंगे।

स्कीम लागू होने के पहले ही दिन बड़ी संख्या में लोग सोशल मीडिया पर दिल्ली सरकार के इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करते नज़र आयें। दिल्ली सरकार को भी लग रहा था कि कहीं यह नियम उनके खिलाफ नकारात्मक माहौल न बना दे। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कदम फूंक - फूंक कर रखते हुए कहा की यह योजना सिर्फ ट्रायल बेसिस पर 1 जनवरी से 15 जनवरी तक चलेगी। लेकिन जनभागीदारी और वॉलेंटियर का सहयोग काफी रचनात्मक रहा।
कभी मेक्सिको सिटी भी दिल्ली की तरह दुनिया का प्रमुख प्रदूषित शहरों में से एक था। 1992 में यूनाइटेड नेशन्स ने मेक्सिको सिटी को सबसे प्रदूषित शहर का दर्जा दिया। 1998 तक मेक्सिको सिटी बच्चों के लिए सबसे खतरनाक शहर बन गया। एक समय मेक्सिको सिटी इतनी प्रदूषित हो गई था कि एक्सपर्ट्स मेक्सिको सिटी को 'मेक सिक को' यानी 'बीमार बनाता' है के नाम से बुलाते थे। क्योंकि प्रदूषण की वजह से काफी लोग बीमार पड़ते थे।
मेक्सिको की सरकार ने इसपर रिसर्च कराई।अगर पीएम-10 को 10 प्रतिशत कम कर दिया जाए तो देश में सालाना 760 मीलियन डॉलर बचाए जा सकते हैं। अंदाजा लगा लीजिये यह कितनी बड़ी रकम हैं।
1990 में मेक्सिको सिटी ने एक नया प्रोग्राम शुरू किया, जिसका नाम था 'प्रो-एयर' इस प्रोग्राम के दौरान कई ऐसे कदम उठाए गए, जिसकी वजह से प्रदूषण में कमी आई। शहर के अंदर जितनी पुरानी फैक्ट्रियां थी, उन्हें बंद कर दिया गया। कार पुलिंग की गई। 20 साल से ज्यादा पुरानी कारों को हटाया गया। 'प्रो-बिकी' के नाम से एक प्रोग्राम शुरू किया गया, जिसके तहत लोग बाइक शेयर करने लगे। लोगो को सार्वजनिक परिवहन के लिए प्रोत्साहन किया गया। पेड़ पौधे लगाये गए। यही वजह रही प्रदूषण नियंत्रण में मेक्सिको की सरकार को भारी सफलता मिली।
बीजिंग की तुलना में दिल्ली की स्थिति अभी उतनी भयावह नही हैं। दिल्ली की तरह वहां भी कार स्कीम चली हैं। बीजिंग में रेड अलर्ट जारी होते ही स्कूलों को बंद कर दिया जाता हैं। पिछले साल कुछ लोग नौकरी छोड़ कर गांव लौट रहें हैं। दिल्ली में खुद प्रदूषण के कारण परीक्षण में पाया गया की दिल्ली के लोगों का फेफड़ा 20% कम काम कर रहा हैं। दिल्ली में प्रदूषण में बहुत बड़ा सहयोग ट्रकों का भी रहा हैं। इसके अलावा इस स्कीम में छुट अब तक वीआईपी गाड़ियों,महिला चालक और टैक्सियों को मिला।

लेकिन अभी दिल्ली सरकार को बहुत काम करना बाक़ी हैं विशेषकर बहुत सारी बसें चलानी हैं। पैदल तथा साइकिल सवार के लिए विशेष लेन। सरकार ने एक अच्छी घोषणा करते हुए कहा जो रुपये इस स्कीम के तहत जमा हुए हैं उनका खर्च सरकार पर्यावरण प्रोत्साहन के लिए करेगी और साइकिल खरीदने पर सरकार सब्सिडी देगी।

कहा जा रहा हैं इस योजना से ना सिर्फ ट्रैफिक सामान्य हुआ बल्कि पार्किंग का समस्या पर भी काबू हुई।
आप स्वयं दलगत से ऊपर उठकर आने वाले पीढ़ी यहाँ तक हमलोग को स्वयं इसके चपेटे में बुरी तरह जकड़े हैं के बारे में सोचिये।
मेरा नारा हैं -प्रदूषण मुक्त दिल्ली
खुशहाल दिल्ली


आमिर खान देशद्रोही हैं ?



आमिर खान हाय..हाय..

सोशल मीडिया में इन दिनों 'असहिष्णुता' को लेकर खूब बवाल मचाया जा रहा हैं। साल के शुरुआत के साथ जो तेवर भाजपा अपना रही हैं लग नही रहा इस साल भी यह मुद्दा थमेगा। आमिर खान पर हमला जिस तरह से किया जा रहा हैं वह कतई सही नही हैं। विवाद लगभग थम गया था फिर ऐन वक़्त पर विजयवर्गीय और मनोज तिवारी ने मामलें को तुल पकड़ा दिया। सोशल मीडिया पर खूब विरोध कर ,पुतला जला कर पोस्टर तोड़ फोड़ कर हम बता दिए हैं की हम कितने सहिष्णु हैं।
इस साल के आखिर में यानी क्रिसमस पर रिलीज हो रही आमिर खान की दंगल को निशाना इसी साल के शुरुआत से ही बनाया जाने लगा। क्योंकि बीजेपी के बड़े नेता और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने आमिर पर निशाना साधते हुए एक सभा को दौरान कहा, ”जब कोई इस समाज को यह कहता है कि असहिष्णुता बढ़ गई है तो जरा गुस्सा आता है …फिर उसको उसका इलाज करना पड़ता है कि इलाज जरूरी है क्योंकि वो असहिष्णु बोल रहा है। क्योंकि एक इलाज हो गया दूसरा इलाज करना बाकी है। दंगल में मंगल करना है ध्यान रखना सब लोग जरा.”

गौरतलब हैं की एक का इलाज का मतलब  शाहरुख से हैं। मगर सवाल उठता हैं क्या वास्तव में शाहरुख़ की बयानबाज़ी के कारण फ़िल्म 'दिलवाले' को नुकसान हुआ। लेकिन विश्लेषणात्मक बात की जाये तो नुकसान बिल्कुल थोड़ा सा लग रहा हैं। अक्सर बड़े स्टार की मूवी छुट्टियों में बिना किसी अन्य मूवी के टकराहट के साथ प्रदर्शित होती हैं। 
यहाँ तक 'हैप्पी न्यू ईयर' जैसी फ़िल्म भी 200  करोड़ के पास पहुंची गई थी। जानने वालों में मैं शाहरुख का सबसे बड़ा फैन हूँ। सिनेमा घर से निकलने के बाद मैं इसे बकवास करार दिया था।मगर इस बार शाहरुख की मूवी की पहली गलती हुई फ़िल्म 'बाजीराव मस्तानी' के साथ 'दिलवाले' को रिलीज़ करने की।
दिलवाले और बाजीराव मस्तानी के एक साथ रिलीज़ होने की वजह से थिएटर और दर्शक बंटे, लिहाज़ा कमाई भी बंट गई। 18 दिसंबर को 33.80 करोड़ का बॉक्स ऑफिस पर कारोबार हुआ, वो भी बिना किसी छुट्टी के मगर ये पैसे बंट गए। 'दिलवाले' के हिस्से में जहां 21 करोड़ आए वहीं, 'बाजी राव मस्तानी' की झोली में 12.80 करोड़। यानि 'दिलवाले' और 'बाजीराव मस्तानी' अकेले-अकेले रिलीज़ होती तो ये पूरी कमाई किसी एक की होती। लेकिन यह कलेक्‍शन दोनों फिल्मों के बीच बंट गया। यहाँ रोहित की गलती थी जब संजय लीला भंसाली ने बाजीराव मस्तानी के लिए पहले ही डेट बुक करवा लिए थे तो रोहित को साथ में रिलीज करने की क्या जरूरत पड़ी थी।
'दिलवाले' को एक मसाला फ़िल्म थी जिससे दर्शकों ने एक बार देखा और इसे रिपीट वैल्यू का फायदा नही मिल सका। अगर शाहरुख के जगह कोई और रहता तो वर्ल्ड वाइड 350 करोड़ से ज्यादा का कोरबार कर नही पता। वह भी तब जब इतने शो कैंसल हुए।

पर्यटन मंत्रालय की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने आमिर खान को देशद्रोही कह दिया।
सवाल ये है कि असहिष्णुता पर बात करने की वजह से आमिर खान देशद्रोही हो गए?
आमिर को देशद्रोही कहने के आरोप में घिरे बीजेपी सांसद मनोज तिवारी कह रहे हैं कि अब आमिर को अतुल्य भारत कहने का कोई हक नहीं है। स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में कांग्रेस सांसद कुमारी सेलजा ने अतुल्य भारत अभियान का मुद्दा उठाया। टीएमसी सांसद रीताब्रता बनर्जी ने पूछा कि आमिर खान को क्यों हटाया गया है? इसी पर मनोज तिवार ने कहा कि वो देशद्रोही है। हटा के ठीक किया। हालांकि मनोज तिवारी इससे इंकार करते रहें।
लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का खामियाजा आमिर को अतुल्य भारत के कैंपन से हट कर करना पड़ा।
सरकार ने सफाई दी हैं कि अतुल्य भारत कैंपेन बनाने वाली कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया था इसलिए आमिर विज्ञापन से बाहर हो गए।

हालिया दिनों में जिस तरह गतिविधि केंद्र सरकार एवं उनके समर्थको द्वारा की जा रही हैं नही लगता कभी यह मुद्दा थमेगा भी। इन दिनों मोदी भक्तों द्वारा किये जा रहे क्रियाकलापों को देखते हुए कहा जा रहा हैं- 'मोदी के अंधभक्त अपने  कुतर्क से मोदी का लुटिया डूबा देंगे'

अगर केंद्र सरकार को लगता था की आमिर का बयान गैर जरूरी था। केंद्र सरकार आमिर को एक मौका देकर अपनी सहिष्णुता और महानता का परिचय दे सकती थी।
स्वयं आमिर का उत्साह और पश्चताप(यदि कोई असहमत हो तो) का मिलन काफी उद्दीप्तपन पैदा कर देता।
मगर लगातार हो रहें हमलें काफी दुखद हैं कही न कही आमिर की आशंका को सच साबित कर रहा हैं। आमिर के शब्दों में 'सबसे पहले मैं एक बात साफ करना चाहूंगा,  न मेरा,  न मेरी पत्नी का देश छोड़ने का कोई इरादा है। न हमारा ऐसा कोई इरादा था,  न है और न होगा। जो कोई भी ऐसी बात फैलाने की कोशिश कर रहा है,  उसने या तो मेरा इंटरव्यू नहीं देखा, या जानबूझकर गलतफहमी फैलाना चाह रहा है। भारत मेरा देश है,  मैं इससे बेइंतहा प्यार करता हूं और यही मेरी सरज़मीं है।
दूसरी बात,  इंटरव्यू के दौरान जो भी मैंने कहा है,  मैं उस पर अटल हूं। जो लोग मुझे देशद्रोही कह रहे हैं उनसे मैं कहूंगा,  मुझे गर्व है अपने हिन्दुस्तानी होने पर और इस सच्चाई के लिए मुझे न किसी की इजाजत की जरूरत है और न ही किसी के सर्टिफिकेट की। जो लोग इस वक्त मुझे गालियां दे रहे हैं, क्योंकि मैंने अपने दिल की बात कही है, उनसे मैं कहना चाहूंगा कि मुझे बड़ा दुख है कि वो मेरा कहा सच साबित कर रहे हैं और उन सारे लोगों का मैं शुक्रिया अदा करना चाहूंगा जो आज इस वक्त मेरे साथ खड़े हैं। हमें हमारे खूबसूरत और बेमिसाल देश के चरित्र को सुरक्षित रखना है। हमें सुरक्षित रखना है इसकी एकता को, इसकी अखंडता को,  इसकी विविधता को,  इसकी सभ्यता और संस्कृति को, इसके इतिहास को,  इसके अनेकतावाद के विचार को,  इसकी विविध भाषाओं को,  इसके प्यार को,  इसकी संवेदनशीलता को और इसकी जज्बाती ताकत को।’ आखिर में उन्हें रविन्द्र नाथ की कविता का सहारा लेना पड़ा।

आमिर के बयान में साफ दिख रहा था की उनकी पत्नी जब वह बाते आमिर से कही वह बातें आमिर के लिए बेहद कस्टप्रद(distressful)था।
फिर भी केंद्र सरकार को मौका देना ही चाहिए था।
क्या ये लोग ट्रेन रोक रहें थे। सरकारी कार्य में बाधा डाल रहें थे। तोड़-फोड़ मचा रहें थे। नही ना बस शांति से बिना हिंसक हुए अपनी बात रख रहें थे।
मशहूर फिल्म निर्देशक राजकुमार हिरानी की टिप्पणी "मीडिया में जो ख़बरें आती हैं उस पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता।"
मीडिया के काम करने के तरीक़े पर टिप्पणी करते हुए वे कहते हैं, अक्सर ख़बरों को बेचने के लिए विवाद खोजे जाते है। अच्छी ख़बरें भी होती है लेकिन उनकी जगह विवादों से भरी ख़बरें दिखाई जाती है। "आमिर के साथ जो हुआ उससे मुझे बहुत बुरा लगा, उसे पाकिस्तान जाने के लिए कहा गया, मेरा मानना है जब वह भारत में पैदा हुआ है तो उसे हर बात कहने का हक़ है।"

खैर लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि होता हैं अतः क्या आप आमिर को एक चांस देना चाहते हैं या नही ?


क्या पूरा विश्व एक परिवार नही बन सकता

द्वितीय विश्व युद्ध, 6 अगस्त और 9 अगस्त 1945
स्थान: ,जापान
परिणाम: परमाणु बम की आग में अब तक जापान  झुलस रहा हैं

अल्फ्रेड ने जब डायनामाइट बनाया होगा तब जरूर इसके हर पहलु पर विचार किया होगा। वह घड़ी निश्चित ही ऐतिहासिक क्षण वाला होगा। बम बनाने से पहले भी  राजा अपनी सीमा के विस्तार के लिए हजारों लोगो का प्राण ले लेते थे। अब वर्चस्व की लड़ाई में पूरी दुनिया इसके जद में हैं। हर देश मिशाइल बनाने की होड़ में लगा हैं। हर देश परमाणु संपन्न होना चाहता हैं। सभी चाहते हैं की सबसे ज्यादा उन्नत तकनीकी की युद्ध सामग्री  उनके पास हों। जो देश बीच में हैं वे पिस रहें हैं। वीटो पॉवर वाले देश कूटनीति रास्ता अख़्तियार करते हैं। जो भी देश परमाणु बनाता हैं कहता हैं उस देश की सुरक्षा के लिए हैं। शायद अगले 10 सालों में ऐसा वक़्त ना आये की परमाणु युद्ध हों। लेकिन जरा सोंचिये 1918 के बाद किसने सोंचा था महज 18 साल बाद फिर एक बार मानवता ताक पर रख दी जायेगी। लाखों लोग 1914-1918 की तरह 1939-1945 में भी मारे गए। जो उपलब्धता जिस समय होती हैं उसी से युद्ध लड़े जाते हैं। जैसे-जैसे आधुनिक हथियार का विकास होता रहा वैसे-वैसे युद्ध में मारे गए लोगों का भी इजाफ़ा हुआ। कभी तलवार तो फिर तोफ फिर बन्दूक मिसाइल परमाणु तक। जब तलवार थी तो सैनिक तलवार से लड़ते थे। अगली बार जब विश्व युद्ध होगा तो ज्यादतर देश परमाणु और हाइड्रोजन बम से लड़ेंगे। आप नुकसान का अंदाजा लगा लीजिये। आखिर इन मामलों पर विश्व समुदाय कड़ा प्रतिबंध सिर्फ कुछ सालों के लिए ही क्यों लगता हैं। या फिर सब का सहयोग बराबर क्यों नही मिलता।

उत्तर कोरिया का हाइड्रोजन बम धमाका बेहद डरावना था। जैसा की ज्ञात हैं हाइड्रोजन बम परमाणु बम से ज्यादा खतरनाक और शक्तिशाली होता हैं। आखिर क्यों उत्तर कोरिया इतनी बड़ी मात्रा में संहारक क्षमता हासिल कर रहा हैं तो उसका जवाब हैं दक्षिण कोरिया के लिए। मुश्किल परिस्थिति यह हैं विश्व के ज्यादातर देशों में जहां तानाशाह वाली सरकार हैं उनका रवैया कभी भी अंतरास्ट्रीय मामलों में जिम्मेदार नही रहा हैं। ये तो मामला ऐसी तानाशाह सरकार का हैं जहां की व्यवस्था इतनी पिछड़ी हैं की अब भी गरीबी,भुखमरी और मूल-भुत सुविधाओं से अब भी लोग जूझ रहें हैं।
जैसे हम पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान के विभाजन के लिए पूरे दौर पूर्वी पाकिस्तान के लिए खड़े रहें वैसे ही कोरिया विभाजन के लिए अमेरीका पूरी तरह से दक्षिण कोरिया के साथ खड़ा रहा। फलतः उत्तर कोरिया अपना दुश्मन अमेरिका को भी घोषित कर दिया। उसका ध्यान इस ओर उन्नत तकनीकी हासिल करने में लगा रहा और ऐसी मिसाइल प्रणाली विकसित की कि अमेरिका तक मार कर सके। अंदेशा यह हैं कई आतंकवादी संघठन अमेरिका के विरुद्ध लगातार कार्य कर रहें हैं। अगर ये संघठन उत्तर कोरिया को विश्वास में लेकर मिसाइल और हाइड्रोजन हासिल कर लेता हैं तो आप इसके परिणाम का अंदाजा लगा लीजियेगा।

अच्छी बात हैं अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके साथ-साथ उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग की निजी संपत्ति और उत्तर कोरिया की आमदनी के स्रोतों को खत्म करने का मन बना लिया है। इसी को लेकर अमेरिका की संसद में एक विधेयक पेश किया गया है। इस विधेयक के लागू होने से उत्तर कोरिया में  कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लग जायेगा।
मुख्यतः उत्तर कोरिया की आमदनी के दो प्रमुख स्रोत हैं। पहला, प्रवासियों का वापस अपने देश में विदेशों से कमाकर  भेजा जाने वाला पैसा और दूसरा, पर्यटन के केंद्र के तौर दुनियाभर के सैलानी का आकर्षण केंद्र बिंदु। ख़बर हैं की
अमेरिका इन दोनों पर पाबंदी लगाने जा रहा है। साथ ही किम जोंग के विदेशों में कई जगह खाता हैं  इन सभी  विदेशी बैंकों में जमा संपत्ति को भी जब्त की जायेगी । बताया जाता है कि किम के 200 से ज्यादा विदेशी खातों में करीब पांच अरब डॉलर की संपत्ति जमा है।

लेकिन सबसे ढुलमुल रवैया चीन का रहा, चीन की टालमटोल के बाद इस आर्थिक पाबंदी के कामयाब होने पर संशय के बादल छाने लगे हैं। चीन का कहना है कि वह हाइड्रोजन बम परीक्षण को लेकर उत्तर कोरिया पर कार्रवाई तो करना चाहता है, लेकिन वह उसको दी जाने वाली तेल सप्लाई नहीं काटेगा, क्योंकि ऐसा करने से उत्तर कोरिया तबाह हो जाएगा ।  चीन चाहे तो अकेले सूरत में उत्तर कोरिया को तबाह कर सकता हैं। इस समय उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा मददगार चीन है,उत्तर कोरिया को हर साल 10 लाख टन कच्चा तेल बेचता है।

लेकिन सवाल उभरती हैं क्या हमारी नीति सिर्फ छोटे और कमजोर देशों को डराने भर के लिए हैं।अमेरिका,रूस चीन से कब सवाल पूछे जायेंगे। आखिर क्यों वे इतनी बड़ी मात्रा में बम मिसाइल और अन्य उपकरण का विकास कर रहें हैं। ज्यादा युद्ध सामग्री बनाने में मची होड़ से हाल में चीन ने ज्यादा ताकत वाली नई ‘रॉकेट फोर्स’ बनायी हैं।

चीन ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए एक नई स्वतंत्र फ़ोर्स का गठन किया है। इसे उसने रॉकेट फ़ोर्स का नाम दिया है। यह फ़ोर्स परमाणु पनडुब्बियों, बमवर्षक विमानों और मिसाइलों से लैस होगी।  दुनिया में अपनी तरह की इकलौती मानी जा रही यह फ़ोर्स धरती, समंदर और आसमान तीनों में एक साथ मार करने में सक्षम है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ से प्राप्त जानकारी के  मुताबिक सरकार ने यह कदम नए साल पर सेना में किये जा रहे बड़े बदलाव के तहत उठाया है। उसके अनुसार यह रॉकेट फ़ोर्स अमेरिका, रूस , ब्रिटेन और फ्रांस की स्पेशल फ़ोर्स के मुकाबले ज्यादा ताकतवर और एकीकृत होगी। जाहिर है चीन से प्रतिद्वन्दी वाले देश भी इसी तरह का प्रयास करेगी।

मुझे नही लगता यह होड़ कभी थमेगा यद्दपि विश्व समुदाय ईमानदार  प्रयास करे तो। हजारों बार परमाणु निरस्त्रीकरण की बात कही जाती हैं। परंतु गंभीर प्रयास कभी नही हुआ। हमेशा से परमाणु हथियारों पर खास देशों का एकाधिकार रहा हैं। जरूरत हैं इस नीति को बदलने का। सभी देश परमाणु निरस्त्रीकरण के बारे सोचना शुरू कर दे। लोग जागरूक भूमिका निभाये। संघटनात्मक रूप हासिल कर पूरी दुनिया में इसका विस्तार किया जाये। पूरा विश्व हमारा परिवार हैं (  वसुधैव कुटुम्बकम् ) इस सोंच को आगे लेकर जाया जा सकता हैं। सबसे जरूरी बिना किसी आर्थिक दबाव और बिना  राजनीतिक पूर्वाग्रह के सही अर्थो में लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रसार कर इस और कदम बढ़ाया जाय। वरना इन्ही पूर्वावग्रह का नतीजा रहा जिससे आतंकवाद की पैर जमी। दुनिया में विशालकाय मौते हो रही हैं। ईमानदार प्रयास ही सफलता की कुंजी हैं। सारे परमाणु हथियार जब नष्ट हो जाये,सरहद का खतरा न हो। वास्तविक मूल्यों की पहचान जब संभव हो जाये। निश्चित ही तब हमारी असली सफलता होगी। और मानवता की एक बड़ी कामयाबी दर्ज होगी जिसके बाद इतिहास सिर्फ नेक कामों को दर्ज करेगा।